भारत और रूस के बीच रक्षा संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने के उद्देश्य से भारतीय सेना के प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने रूस का महत्वपूर्ण दौरा शुरू किया है। इस उच्च-स्तरीय यात्रा का मुख्य केंद्र मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग है, जहाँ सैन्य सहयोग, उन्नत प्रशिक्षण और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने पर गहन चर्चा होगी। दौरे के शुरुआती चरण में जनरल सेठ को मॉस्को में भव्य ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया जाएगा और वे ‘टॉम्ब ऑफ द अननोन सोल्जर’ पर जाकर शहीद सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
उच्च स्तरीय सैन्य वार्ता और रणनीतिक बैठकें
इस दौरे के दौरान जनरल सेठ रूसी सैन्य नेतृत्व के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकों में शामिल होंगे। वे रूसी थलसेना के कमांडर-इन-चीफ, कर्नल जनरल आंद्रेई निकोलायेविच मोर्दविचेव के साथ द्विपक्षीय सैन्य सहयोग और पेशेवर अनुभवों को साझा करने के लिए विशेष चर्चा करेंगे। इसके अलावा, वे मॉस्को स्थित नेशनल डिफेंस कंट्रोल सेंटर का दौरा करेंगे और रूसी रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इस क्रम में, रक्षा उद्योग और खरीद से जुड़े उप रक्षा मंत्री वासिली सर्गेयेविच ओस्माकोव के साथ होने वाली बातचीत में बदलते वैश्विक रक्षा परिदृश्य और रक्षा उपकरणों की खरीद से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर मंथन किया जाएगा।
रक्षा संबंधों का भविष्य और शैक्षणिक सहयोग
अपनी यात्रा के अगले चरण में, जनरल सेठ सेंट पीटर्सबर्ग पहुंचेंगे, जहां वे प्रतिष्ठित मिखाइलोव्स्काया मिलिट्री आर्टिलरी अकादमी का दौरा करेंगे। यहाँ वे अकादमी के नेतृत्व और फैकल्टी के साथ सैन्य शिक्षा और तकनीकी कौशल पर संवाद करेंगे। गौरतलब है कि भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग का इतिहास काफी पुराना और अटूट रहा है, जिसमें ‘इंद्र’ जैसे साझा सैन्य अभ्यास और अत्याधुनिक रक्षा तकनीक का आदान-प्रदान शामिल है। 30 जून 2026 को 31वें थलसेना प्रमुख के रूप में पदभार संभालने वाले जनरल धीरज सेठ का यह दौरा दोनों देशों के बीच सामरिक समन्वय को भविष्य में और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

