वंदे मातरम गायन पर सियासी घमासान: खड़गे का बड़ा बयान
कर्नाटक के गृह मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रियंक खड़गे ने ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर छिड़े राजनीतिक विवाद के बीच एक बड़ा बयान दिया है। बीजेपी नेताओं पर तीखा हमला बोलते हुए खड़गे ने बीवाई विजयेंद्र और आर. अशोक को सीधी चुनौती दे डाली है। उन्होंने कहा कि यदि ये नेता बिना किसी टेलीप्रॉम्प्टर या लिखित कागज की सहायता के ‘वंदे मातरम’ के सभी छंद (stanzas) गाकर दिखा सकते हैं, तो वे स्वयं अपने पद से इस्तीफा देने को तैयार हैं। खड़गे का यह कड़ा रुख कर्नाटक सरकार द्वारा सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के केवल दो अंतरे गाने के निर्णय के बाद आया है।
कांग्रेस का स्टैंड और 1937 का ऐतिहासिक प्रस्ताव
विवाद की जड़ कर्नाटक सरकार का वह आदेश है, जिसमें सरकारी आयोजनों में ‘वंदे मातरम’ के केवल पहले दो अंतरे गाने की बात कही गई है। कांग्रेस पार्टी ने इस फैसले का बचाव करते हुए स्पष्ट किया कि यह निर्णय कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) के 1937 के ऐतिहासिक प्रस्ताव का पालन करने के लिए लिया गया है। इस पुराने प्रोटोकॉल के अनुसार, पार्टी के कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के केवल दो पैरा ही गाए जाते हैं। हालांकि, यह मामला तब और गरमा गया जब बीजेपी ने कांग्रेस पर राष्ट्रगीत के पूर्ण संस्करण को न गाकर उसका अपमान करने का आरोप लगाया। इसके विपरीत, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 9 जुलाई को निर्देश जारी किए थे कि ‘वंदे मातरम’ के सभी 6 छंदों का गायन किया जाना चाहिए।
गायन प्रोटोकॉल और भविष्य के कानूनी प्रावधान
वर्तमान प्रोटोकॉल के अनुसार, यदि किसी कार्यक्रम में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों का समावेश है, तो पहले ‘वंदे मातरम’ और उसके बाद ‘जन गण मन’ का गायन किया जाना अनिवार्य है। वहीं, यदि किसी राज्य का अपना राज्य गीत है, तो क्रम राज्य गीत, फिर वंदे मातरम और अंत में राष्ट्रगान का होगा। इस विवाद के बीच, राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर कानूनी सख्ती की भी चर्चा है। रिपोर्टों के अनुसार, 2026 के मानसून सत्र में केंद्र सरकार ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम’ ला सकती है। इस प्रस्तावित कानून के तहत ‘वंदे मातरम’ के गायन में जानबूझकर बाधा डालना या उसका सार्वजनिक अपमान करना दंडनीय अपराध माना जाएगा, जिसमें 3 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान हो सकता है।

