BRICS समिट के दौरान मोदी-जिनपिंग की अहम मुलाकात: सीमा विवाद और व्यापारिक संबंधों पर हुई विस्तृत चर्चा
ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक ने वैश्विक कूटनीति के गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है। नई दिल्ली में आयोजित इस महत्वपूर्ण वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि आपसी मतभेदों को विवाद का रूप नहीं दिया जाना चाहिए और दोनों देशों को अपने संबंधों को एक रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता का होना एक अनिवार्य आधार है।
बैठक के दौरान ताइवान और तिब्बत जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी गहन चर्चा हुई, जिस पर भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट रखी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, भारत अपनी नीतियों में कोई बदलाव नहीं करेगा और वह अपनी धरती का उपयोग किसी भी प्रकार की चीन विरोधी गतिविधियों के लिए करने की अनुमति नहीं देगा। प्रधानमंत्री ने संबंधों को सुदृढ़ बनाने के लिए तीन प्रमुख सिद्धांतों का आह्वान किया, जो भविष्य की कूटनीति का मार्गदर्शन करेंगे:
आर्थिक मोर्चे पर, दोनों नेताओं ने संरचनात्मक व्यापार असंतुलन (trade imbalance) और सप्लाई चेन से जुड़ी चिंताओं को दूर करने की आवश्यकता पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने एक ऐसे बाजार तंत्र की आवश्यकता पर जोर दिया जो पूर्वानुमानित और सुलभ हो। इसके अतिरिक्त, दोनों पक्षों ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान और व्यापारिक संबंधों को प्रगाढ़ करने के लिए लोगों के बीच आवाजाही बढ़ाने पर भी सहमति जताई। इस उच्च-स्तरीय बैठक में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की उपस्थिति ने भारत की मजबूत कूटनीतिक और सुरक्षात्मक स्थिति को रेखांकित किया।

