ढाका यूनिवर्सिटी (DU) परिसर में एक बार फिर राजनीतिक विवादों का माहौल गरमा गया है। हाल ही में, विश्वविद्यालय के छात्रों ने परिसर से मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीरों को हटा दिया और उनकी जगह जमात-ए-इस्लामी के पूर्व प्रमुख गुलाम आज़म की तस्वीरें लगा दीं। यह घटना परिसर के अंदर चल रहे गहरे राजनीतिक मतभेद और छात्र राजनीति के बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है। इस कार्रवाई ने न केवल विश्वविद्यालय के शैक्षणिक माहौल पर सवाल उठाए हैं, बल्कि प्रशासन और छात्र नेताओं के बीच तनाव को भी चरम पर पहुंचा दिया है। यह विवाद परिसर की ऐतिहासिक पहचान और वर्तमान राजनीतिक विचारधाराओं के टकराव का प्रतीक बन गया है।
इस विरोध के पीछे की कहानी DUCSU (ढाका यूनिवर्सिटी सेंट्रल स्टूडेंट्स यूनियन) के चुनाव और छात्र राजनीति के व्यापक बदलाव से जुड़ी है। बीते सितंबर 2025 में हुए DUCSU चुनाव में जमात-ए-इस्लामी के छात्र विंग ‘इस्लामी छात्र शिबिर’ ने अभूतपूर्व जीत हासिल की थी। शिबिर समर्थित उम्मीदवार प्रमुख पदों जैसे वीपी (VP), जीएस (GS) और एजीएस (AGS) पर काबिज हो गए। यह चुनाव अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद DUCSU का पहला बड़ा चुनाव था। उल्लेखनीय है कि इस चुनाव में अवामी लीग के छात्र विंग ‘छात्र लीग’ ने हिस्सा नहीं लिया, जिसके बाद से ही विश्वविद्यालय परिसर में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। वर्तमान में, विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, DUCSU की कार्यकारी समिति का एक बड़ा हिस्सा शिबिर से जुड़ा हुआ है, जिसने परिसर की राजनीतिक दिशा को एक विशेष मोड़ दिया है।
राजनीतिक बदलावों के इस दौर में, विश्वविद्यालय प्रशासन को भी हस्तक्षेप करना पड़ा है। विश्वविद्यालय के पब्लिक रिलेशंस ऑफिस ने DUCSU द्वारा लिए गए कुछ हालिया फैसलों पर आपत्ति जताई है, यह कहते हुए कि इन फैसलों में विश्वविद्यालय के स्थापित कानूनों और नियमों का पालन नहीं किया गया है। वाइस चांसलर डॉ. एबीएम ओबैदुल इस्लाम ने स्पष्ट रूप से कहा है कि “

