वोटिंग नियमों पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: ट्रम्प के बदलावों पर लगी रोक बरकरार; मिडटर्म चुनाव से पहले बड़ी चुनौती

वोटिंग नियमों पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: ट्रम्प के बदलावों पर लगी रोक बरकरार; मिडटर्म चुनाव से पहले बड़ी चुनौती

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डाक मतपत्र (mail-in voting) से जुड़े नियमों को सख्त करने के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के आदेश पर लगी रोक हटाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने 7-2 के फैसले के साथ निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा है। यह मामला आगामी नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों से गहराई से जुड़ा हुआ है। ट्रम्प ने पहले मार्च में ऐसे नए नियम लागू करने का आदेश दिया था, जिसके तहत उनका सुझाव था कि डाक से वोट भेजने वाले हर मतदाता की सूची राज्यों द्वारा अमेरिकी डाक सेवा (USPS) को प्रदान की जाए। इस कदम का मुख्य उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया में कथित ‘गड़बड़ी’ को रोकना था, लेकिन विपक्षी दलों और नागरिक अधिकार समूहों ने इसका पुरजोर विरोध किया है।

विरोधियों का तर्क है कि ऐसे सख्त नियम लागू होने से चुनाव के दौरान आम मतदाताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। निचली अदालत ने पहले ही कहा था कि यदि किसी मतदाता की पहचान या नाम प्रस्तावित सूची में नहीं मिलता है, तो USPS को उस मतपत्र को रोकने का अधिकार होगा। इस मामले पर बोलते हुए जस्टिस ब्रेट कावानॉ ने एक महत्वपूर्ण पहलू पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही ट्रम्प की योजना को भविष्य के चुनावों के लिए लागू किया जा सकता है, लेकिन नवंबर के मिडटर्म चुनाव से ठीक पहले पूरी चुनावी व्यवस्था में इतना बड़ा बदलाव करना व्यावहारिक रूप से असंभव है। चुनाव अधिकारियों के पास इस नई और जटिल प्रणाली को तैयार करने, विभिन्न राज्यों में लागू करने और उसकी पूरी तैयारी करने के लिए पर्याप्त समय नहीं बचा है।

यह घटनाक्रम अमेरिकी राजनीति में चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा को लेकर चल रहे गहरे मतभेद को दर्शाता है। डाक मतपत्र का उपयोग मूल रूप से सैनिकों और उन लोगों के लिए किया जाता था जो मतदान केंद्र तक नहीं पहुंच पाते थे, लेकिन 2020 के चुनावों के बाद इसका चलन व्यापक रूप से बढ़ गया। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय न केवल ट्रम्प के चुनावी एजेंडे पर एक झटका है, बल्कि यह भी दिखाता है कि अमेरिकी न्यायिक प्रणाली में चुनावी प्रक्रियाओं की सुरक्षा और सुगमता के बीच संतुलन बनाना कितना जटिल है। चूंकि नवंबर में कांग्रेस के दोनों सदनों में चुनाव होने जा रहे हैं, इसलिए यह कानूनी और राजनीतिक लड़ाई आने वाले समय में अमेरिका की चुनावी स्थिरता पर एक बड़ा सवाल बनी रहेगी।