मणिपुर के पहाड़ी इलाकों में जारी संघर्ष से बढ़ी मुश्किलें
मणिपुर के पहाड़ी जिलों में कुकी और नगा समुदायों के बीच जारी तनाव ने स्थिति को बेहद भयावह बना दिया है। पिछले सात दिनों से कई क्षेत्रों में स्कूल और बाजार पूरी तरह बंद हैं, जिससे आम नागरिकों का दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। हाईवे और प्रमुख सड़कों पर लगी नाकेबंदी के कारण सात पहाड़ी जिलों का संपर्क बाहरी दुनिया से लगभग कट गया है। सप्लाई चेन बाधित होने का सीधा असर खाद्य सामग्री की कीमतों पर पड़ा है; स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, कांगपोकपी जैसे क्षेत्रों में चीनी की कीमत बढ़कर ₹400 से ₹450 प्रति किलो तक पहुंच गई है। लोग डर के साये में घरों से बाहर निकलने में भी कतरा रहे हैं।
हिंसा और हत्याओं की बढ़ती घटनाएं
पिछले चार दिनों में हुई हिंसा ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, चार महिलाओं सहित कुल छह कुकी लोगों की हत्या कर दी गई है, जिसके लिए कुकी संगठन नगा समुदाय को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। बुधवार को कांगपोकपी के चावांगकिनिंग लियांगमाई गांव में संदिग्ध सशस्त्र उग्रवादियों ने हमला कर कई घरों को आग के हवाले कर दिया और अंधाधुंध फायरिंग की। इस दौरान CRPF के जवानों ने मोर्चा संभाला और जवाबी कार्रवाई की। इसी तरह, तामेंगलोंग जिले के लीसांगफाई गांव में भी दो कुकी महिलाओं की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इन घटनाओं ने पूरे राज्य में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
गहराता संकट और भविष्य की चुनौतियां
मणिपुर में यह संघर्ष मई 2023 में मैतेई और कुकी-जोमी समुदायों के बीच शुरू हुई हिंसा की एक लंबी और दर्दनाक कड़ी है। इस साल फरवरी में उखरुल के लिटन गांव से तनाव फिर से भड़क उठा, जिसके बाद से अब तक लगभग 40 लोगों की जान जा चुकी है। वर्तमान में, नगा बहुल जिलों (जैसे उखरुल, सेनापति, तामेंगलोंग) और कुकी बहुल क्षेत्रों के बीच बढ़ती दूरी और सड़कों पर लगे चेक-पॉइंट्स ने आवाजाही को लगभग असंभव बना दिया है। हालात इतने नाजुक हैं कि मेडिकल इमरजेंसी या एयरपोर्ट जाने के लिए भी लोगों को सब-डिविजनल ऑफिसर (SDO) से अनुमति लेनी पड़ रही है। प्रशासन के लिए शांति बहाली और आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

