देशभर में मानसून की सक्रियता ने जनजीवन को बुरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। बिहार में बाढ़ की स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है, जहाँ राज्य के 15 जिलों की 575 पंचायतों में लगभग 50 लाख की आबादी जलमग्न है। कटिहार जैसे क्षेत्रों में स्थिति इतनी विकट है कि सरकारी स्कूल और कोचिंग सेंटर पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं, जिसके कारण बच्चों को नावों के सहारे शिक्षा ग्रहण करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। वहीं, उत्तर प्रदेश के लखीमपुर में शारदा नदी का भीषण कटान देखने को मिला है, जिसमें महज 24 घंटों के भीतर 7 मकान नदी की लहरों में समा गए।
मौसम विभाग ने देश के कई हिस्सों के लिए चेतावनी जारी की है। बिहार के 26 जिलों में बारिश का ‘यलो अलर्ट’ जारी किया गया है, साथ ही आकाशीय बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है। उत्तर प्रदेश में भी नदियों के उफान पर होने से करीब 4 लाख लोग प्रभावित हैं। राजस्थान के 26 जिलों में 17 सितंबर तक भारी बारिश का अलर्ट है, जबकि मध्य प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों में भी आने वाले दिनों में मूसलाधार वर्षा की संभावना बनी हुई है।
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में भी कुदरत का कहर जारी है, जिससे यात्रियों और स्थानीय निवासियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पिथौरागढ़ के आदि कैलाश मार्ग पर ‘दोबाट’ क्षेत्र में हुए लैंडस्लाइड (landslide) के कारण सड़क मार्ग एक बार फिर बंद हो गया है। रुद्रप्रयाग में केदारनाथ पैदल मार्ग पर सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं; चीरबासा के पास यात्रियों को हेलमेट पहनाकर भेजा जा रहा है। गौरतलब है कि चार दिन पहले हुए भूस्खलन में कई घोड़े और खच्चर मारे गए थे, और उनके शवों से उठने वाली दुर्गंध के कारण यात्रियों को सांस लेने में कठिनाई और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

