प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष: स्वच्छता, स्वास्थ्य और डिजिटल क्रांति के जरिए बदला देश का स्वरूप

प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष: स्वच्छता, स्वास्थ्य और डिजिटल क्रांति के जरिए बदला देश का स्वरूप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनकी यात्रा से लेकर देश के प्रधानसेवक बनने तक, उनके नेतृत्व में भारत ने कई नीतिगत और संरचनात्मक बदलाव देखे हैं। इन दो दशकों के सफर में सरकार की प्राथमिकता केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारकर आम नागरिक के जीवन को सुगम बनाना रही है। स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री जनधन योजना, आयुष्मान भारत और डिजिटल इंडिया जैसी महत्वाकांक्षी पहलों ने देश के सामाजिक और आर्थिक ढांचे में क्रांतिकारी परिवर्तन किए हैं।

बुनियादी सुविधाओं का विस्तार: स्वच्छता और बैंकिंग क्रांति

स्वच्छता के क्षेत्र में स्वच्छ भारत मिशन ने एक नई लहर पैदा की है। 2014 में जब यह अभियान शुरू हुआ, तब ग्रामीण भारत में केवल 39% घरों में ही शौचालय की सुविधा उपलब्ध थी, लेकिन आज यह आंकड़ा 100% तक पहुंच चुका है। आंकड़ों के अनुसार, 17 मार्च 2025 तक देश के लगभग 5,86,788 गांव इस अभियान के दायरे में आ चुके हैं। इस मिशन का आर्थिक प्रभाव भी अत्यंत गहरा है; संयुक्त राष्ट्र बाल कोष के आकलन के अनुसार, स्वच्छता बढ़ने से ग्रामीण परिवारों की बीमारी और इलाज पर होने वाला खर्च कम हुआ है, जिससे वे सालाना लगभग 50 हजार रुपये तक की बचत कर पा रहे हैं।

डिजिटल सशक्तिकरण और स्वास्थ्य सुरक्षा का नया युग

तकनीक के क्षेत्र में डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ने भारत को वैश्विक मानचित्र पर एक नई पहचान दी है। यूपीआई (UPI) के माध्यम से होने वाले सुगम लेनदेन और 106 करोड़ से अधिक ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या इस बात का प्रमाण है कि डिजिटल सेवाएं अब शहरी केंद्रों से निकलकर गांवों तक पहुंच चुकी हैं। सरकारी लाभों को बिना किसी बिचौलिये के सीधे लाभार्थियों के खातों तक पहुंचाने के लिए Direct Benefit Transfer (DBT) के माध्यम से अब तक 51 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर की जा चुकी है।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में आयुष्मान भारत योजना ने मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार किया है। योजना के दायरे को बढ़ाते हुए अब 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को भी इसमें शामिल किया गया है, जिससे करोड़ों बुजुर्गों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही, ई-संजीवनी जैसी डिजिटल सेवाओं ने दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए घर बैठे विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श करना संभव बना दिया है।

“इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य तकनीक और नीति के समन्वय से समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना रहा है।”

निष्कर्षतः, मोदी सरकार के इन 25 वर्षों ने भारत को एक डिजिटल, स्वच्छ और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक राष्ट्र बनाने की दिशा में ठोस आधार तैयार किया है। अब आगामी चुनौती इन सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने और निरंतर विस्तार करने की है ताकि विकास का लाभ हर नागरिक तक बिना किसी बाधा के पहुंचता रहे।