बंगाल का सियासी रणक्षेत्र: नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव में टीएमसी के गुटों का टकराव, भाजपा ने किए उम्मीदवार घोषित

बंगाल का सियासी रणक्षेत्र: नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव में टीएमसी के गुटों का टकराव, भाजपा ने किए उम्मीदवार घोषित

पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर हाई-वोल्टेज ड्रामा का गवाह बनने को तैयार है। राज्य की दो महत्वपूर्ण विधानसभा सीटें – रेजीनगर और नंदीग्राम – उपचुनाव के लिए चुनावी रणक्षेत्र बन गई हैं। भाजपा ने इन दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम आधिकारिक रूप से घोषित कर दिए हैं, जिससे चुनावी माहौल में गरमाहट आ गई है। भाजपा ने रेजीनगर से शाश्वत सरकार और नंदीग्राम से हसीरानी रथ को अपना प्रत्याशी बनाया है। गौरतलब है कि हसीरानी रथ का संबंध मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पूर्व PA चंद्रनाथ रथ से है। यह क्षेत्र हमेशा से टीएमसी और भाजपा के बीच राजनीतिक खींचतान का केंद्र रहा है, जिसका महत्व चुनावी नतीजों से स्पष्ट होता है।

इस उपचुनाव की सबसे बड़ी विशेषता तृणमूल कांग्रेस (TMC) का बिखर जाना है। नंदीग्राम में टीएमसी के दो अलग-अलग गुट एक-दूसरे से आमने-सामने हैं, जो पार्टी की आंतरिक कलह को दर्शाते हैं। एक तरफ रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला ‘बागी’ गुट है, जबकि दूसरी तरफ ममता बनर्जी समर्थित गुट है। दोनों गुट एक ही चुनाव चिह्न पर दावा कर रहे हैं, जिससे चुनाव आयोग (EC) को हस्तक्षेप करना पड़ा है। आयोग ने दोनों पक्षों से अतिरिक्त दस्तावेज मांगे हैं और 16 सितंबर तक जवाब देने का अल्टीमेटम दिया है। यदि समय पर फैसला नहीं होता है, तो पार्टी का मौजूदा चुनाव चिह्न अस्थायी रूप से फ्रीज हो सकता है, जिससे दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चिह्न से चुनाव लड़ने पड़ सकते हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच, एक दुखद पृष्ठभूमि भी सामने आई थी—बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के तीसरे दिन, 6 मई की रात को, नॉर्थ 24 परगना के मध्यमग्राम में शुभेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जिसने क्षेत्र में तनाव और गहरा कर दिया है।

इतिहास में नंदीग्राम सीट का राजनीतिक महत्व हमेशा से रहा है। यहां 2007 में हुए भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ने ममता बनर्जी और टीएमसी को सत्ता की सीढ़ियां चढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 2021 में ममता बनर्जी ने यहीं से वर्तमान बंगाल CM शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव लड़ा था, हालांकि वह हार गईं। इन उपचुनावों से राज्य की राजनीतिक दिशा और शक्ति संतुलन पर गहरा असर पड़ने की संभावना है। इसके अलावा, यह चुनाव केवल बंगाल तक सीमित नहीं है; तमिलनाडु में मदुरंतकम और धारापुरम, पुडुचेरी में थट्टानचावड़ी, और असम में नगांव जैसी अन्य सीटों पर भी उपचुनाव हुए हैं, जिनकी अंतिम वोटर लिस्ट हाल ही में जारी की गई है। ये सभी घटनाक्रम पश्चिम बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य में एक बड़ी उथल-पुथल का संकेत दे रहे हैं, जहां हर सीट पर सत्ता के लिए कड़ा संघर्ष देखने को मिल रहा है।