टेक दिग्गज Meta को अब बच्चों से जुड़े यौन शोषण और उनकी ऑनलाइन सुरक्षा से संबंधित मामलों की विस्तृत जानकारी भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देनी होगी। सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार और Meta के बीच हुई गहन बातचीत के बाद यह सहमति बनी है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य भारतीय प्लेटफॉर्म्स पर हानिकारक और आपत्तिजनक कंटेंट पर पूर्ण विराम लगाना है। यह स्पष्ट किया गया है कि भारत में काम करने वाले किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा एक गैर-समझौता योग्य (non-negotiable) अनिवार्यता है। सरकार ने साफ चेतावनी दी है कि जो प्लेटफॉर्म स्वयं पहल करके बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह निर्णय कई कानूनी दबावों और आयोगों की जांच के बाद सामने आया है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने स्वयं संज्ञान लेते हुए 3 जुलाई 2026 को एक मीडिया रिपोर्ट (BBC) का हवाला दिया, जिसमें Meta के प्लेटफॉर्म्स पर कथित तौर पर बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) से जुड़े विज्ञापनों का जिक्र था। इस मामले की जांच के सिलसिले में NCPCR ने Meta के अधिकारियों को भी तलब किया था। इससे पहले, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया था कि वे उन आरोपों की व्यापक जांच करें जिनमें कहा गया था कि Meta के स्वामित्व वाले इंस्टाग्राम पर पेड विज्ञापनों के ज़रिए CSAM को बढ़ावा दिया गया। NHRC ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि कंपनी ने POCSO (Protection of Children from Sexual Offences) एक्ट के तहत अनिवार्य रिपोर्टिंग जिम्मेदारियों का पालन किया है या नहीं।
इस बीच, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि Meta के अलावा अन्य सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और ऑनलाइन इंटरमीडियरीज़ के साथ भी बातचीत जारी है। इन सभी संस्थाओं से उम्मीद की जा रही है कि वे बच्चों से जुड़े हानिकारक कंटेंट की न केवल पहचान करें, बल्कि उसे तुरंत हटाने के लिए ठोस तकनीकी कदम भी उठाएं। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) के तहत, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अवैध सामग्री हटाने और जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करने के लिए त्वरित कार्रवाई करनी अनिवार्य है। यह घटनाक्रम डिजिटल स्पेस में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सरकार के कड़े रुख और प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रहा है।

