भारत के खिलाफ दुष्प्रचार: अमेरिकी संस्था का दावा निकला पूरी तरह निराधार
हाल ही में अमेरिकी संस्था ‘पॉलीमार्केट’ (Polymarket) द्वारा भारत और ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन के संदर्भ में फैलाई गई भ्रामक सूचनाओं पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाया है। इस कंपनी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से एक बेहद आपत्तिजनक और झूठा दावा किया कि भारत में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शिरकत करने के बाद कई वैश्विक नेता अचानक बीमार पड़ गए हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस पोस्ट का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए इसे एक ‘फेक अलर्ट’ करार दिया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ब्रिक्स सम्मेलन से लौटने वाले किसी भी वैश्विक नेता के बीमार होने की कोई भी आधिकारिक जानकारी या विश्वसनीय रिपोर्ट सामने नहीं आई है, जिससे यह साबित होता है कि यह पूरी तरह से एक सोची-समझी साजिश है।
कौन है पॉलीमार्केट और क्यों फैलाया जा रहा है झूठ?
जांच में यह तथ्य सामने आया है कि झूठ फैलाने वाली इस संस्था का नाम पॉलीमार्केट है, जिसे ब्लॉकराटाइज इंक (Blockataize Inc.) नामक कंपनी संचालित करती है। यह कंपनी अमेरिका के डेलावेयर में रजिस्टर्ड है और इसका मुख्यालय न्यूयॉर्क में स्थित है। इस कंपनी की स्थापना जून 2020 में न्यूयॉर्क के निवासी अरबपति शेन कोप्लान (Shane Coplan) द्वारा की गई थी। पॉलीमार्केट दुनिया की सबसे बड़ी ब्लॉकचेन-आधारित प्रेडिक्शन मार्केट कंपनियों में से एक मानी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिक्स सम्मेलन की सफलता और भारत की बढ़ती वैश्विक साख को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से इस तरह के भ्रामक संदेशों का सहारा लिया गया है।
कंपनी के मालिक के राजनीतिक संबंध और विवादों का इतिहास
पॉलीमार्केट के संस्थापक शेन कोप्लान के राजनीतिक झुकाव ने इस मामले में और अधिक गंभीरता पैदा कर दी है। कोप्लान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेहद बड़े समर्थक माने जाते हैं। उन्होंने 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान ट्रंप की जीत की प्रबल संभावना जताकर काफी सुर्खियां बटोरी थीं। इससे पहले, अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, FBI ने कोप्लान के मैनहट्टन स्थित निवास पर छापा मारा था और उनके इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए थे, जिसे कोप्लान ने बाइडेन प्रशासन द्वारा की गई प्रतिशोध की कार्रवाई बताया था। अब ट्रंप के सत्ता में लौटने के बाद, कोप्लान को व्हाइट हाउस से निमंत्रण भी मिल चुका है। ऐसे में एक अमेरिकी संस्था द्वारा भारत के खिलाफ इस तरह का दुष्प्रचार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक चिंता का विषय बना हुआ है।

