वैश्विक राजनीति में बड़ा बदलाव: कनाडा और यूरोपीय संघ की नई रणनीतिक साझेदारी
अमेरिका के साथ बढ़ते व्यापारिक और कूटनीतिक तनाव के बीच, कनाडा ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। कनाडा अब यूरोपीय संघ (EU) का पहला ‘एसोसिएट मेंबर’ बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। हालांकि, इस विशेष दर्जे के साथ कनाडा के पास EU के नीतिगत निर्णयों पर वोट देने का अधिकार नहीं होगा, लेकिन वह रक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और व्यापार जैसे अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में यूरोपीय देशों के साथ मिलकर काम करेगा। यह कदम न केवल कनाडा के आर्थिक हितों को सुरक्षित करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर उसकी सामरिक स्थिति को भी एक नई दिशा प्रदान करेगा।
सुरक्षा और कूटनीति के नए समीकरण
यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस संबंध में सकारात्मक संकेत देते हुए कहा है कि EU कनाडा के लिए अपने दरवाजे खोलने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस सहयोग का एक बड़ा हिस्सा सुरक्षा के क्षेत्र में देखने को मिलेगा। कनाडा एक नई सिक्योरिटी काउंसिल का हिस्सा बन सकता है, जिसमें ब्रिटेन और यूक्रेन जैसे गैर-EU सदस्य देश भी शामिल होंगे। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी हाल ही में यूरोपीय संघ के साथ एक मजबूत ‘गठबंधन’ बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया था। गौरतलब है कि इस सदस्यता को औपचारिक रूप देने के लिए EU को अपने मौजूदा नियमों में बदलाव करना होगा, जिसके लिए सभी 27 सदस्य देशों की सर्वसम्मति अनिवार्य होगी।
अमेरिका के साथ ‘ट्रेड वॉर’ ने बदली दिशा
कनाडा के इस ऐतिहासिक फैसले के पीछे अमेरिका के साथ जारी कड़ा संघर्ष एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। पिछले 18 महीनों से अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक युद्ध (Trade War) चरम पर है। डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ और उसके जवाब में कनाडा की जवाबी कार्रवाई ने दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में गहरी दरार पैदा कर दी है। 21 अगस्त को द्विपक्षीय बातचीत विफल होने के बाद, दोनों देशों के बीच तनाव और अधिक बढ़ गया है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में, CETA जैसे मौजूदा व्यापार समझौतों और यूरोपीय रक्षा फंड के माध्यम से कनाडा अब अपनी आर्थिक और सामरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यूरोप की ओर रुख कर रहा है।

