उत्तराखंड में पर्यटन को नया आयाम: होमस्टे संचालकों को मिलेगा ‘इको-फ्लावर बैज’, पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा

उत्तराखंड में पर्यटन को नया आयाम: होमस्टे संचालकों को मिलेगा ‘इको-फ्लावर बैज’, पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा

पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन की ओर उत्तराखंड का बड़ा कदम

उत्तराखंड के पर्यटन क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार और पर्यटन विभाग ने अब होमस्टे (Homestay) संचालकों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए एक विशेष पहल शुरू की है। इस नई योजना के तहत, जो होमस्टे संचालक प्रकृति और पर्यावरण के अनुकूल मानकों का कड़ाई से पालन करेंगे, उन्हें विशेष रूप से ‘इको-फ्लावर बैज’ (Eco-Flower Badge) से सम्मानित किया जाएगा। यह कदम न केवल पर्यटकों को ठहरने के लिए बेहतर और जिम्मेदार विकल्प प्रदान करेगा, बल्कि राज्य की अनमोल प्राकृतिक सुंदरता को सुरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस पहल की सबसे खास बात यह है कि ‘ग्रीन मान्यता’ (Green Recognition) प्रदान करने के लिए विभाग ने कुल 10 कड़े मानक निर्धारित किए हैं। इन मानकों के अंतर्गत होमस्टे के संचालन में निम्नलिखित पहलुओं की गहन जांच की जाएगी:

  • अपशिष्ट प्रबंधन (Waste Management) की प्रभावी व्यवस्था।
  • पानी और ऊर्जा के संसाधनों का कुशल उपयोग।
  • सौर ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का प्रयोग।
  • स्थानीय संसाधनों और संस्कृति का संरक्षण।
  • प्लास्टिक के उपयोग में कमी और पर्यावरण अनुकूल सामग्री का प्रयोग।
  • पर्यटन विभाग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पर्यटन का विकास करते समय पारिस्थितिक संतुलन (Ecological Balance) के साथ कोई समझौता न हो।

    इस योजना के लागू होने से उत्तराखंड के ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में सतत पर्यटन (Sustainable Tourism) को नई गति मिलने की उम्मीद है। ‘इको-फ्लावर बैज’ प्राप्त करने वाले होमस्टे पर्यटकों के लिए एक विश्वसनीय ‘ब्रांड’ के रूप में उभरेंगे, जिससे उनकी लोकप्रियता और बुकिंग में वृद्धि होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगी, बल्कि उत्तराखंड को वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख ‘इको-फ्रेंडली टूरिज्म डेस्टिनेशन’ के रूप में स्थापित करने में भी मील का पत्थर साबित होगी। भविष्य में, इस मॉडल के जरिए राज्य में पर्यावरण के प्रति जागरूकता और पर्यटन के बीच एक सटीक संतुलन बनाया जा सकेगा।