उत्तराखंड के नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से जन्म और मृत्यु के पुराने पंजीकरण को लेकर चल रही प्रशासनिक जटिलताओं और असमंजस के बीच अब स्थिति स्पष्ट हो गई है। राज्य में अब एक वर्ष से अधिक पुराने जन्म और मृत्यु के मामलों के पंजीकरण की प्रक्रिया को लेकर नई व्यवस्था को सुव्यवस्थित किया गया है, जिससे आम जनता को आवश्यक दस्तावेज़ प्राप्त करने में बड़ी सुविधा होगी।
पूर्व में, यदि किसी नागरिक को एक साल से अधिक पुराने जन्म या मृत्यु का प्रमाणपत्र बनवाना होता था, तो उसे लंबी प्रक्रिया और विभिन्न स्तरों पर मंजूरी के लिए भटकना पड़ता था। नियमों की स्पष्टता की कमी और जटिल प्रशासनिक चरणों के कारण कई लोग अपने महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों के लिए परेशान थे। अब प्रशासन ने इस प्रक्रिया को सरल बनाते हुए उप-जिलाधिकारी (SDM) को यह अधिकार दिया है कि वे इन पुराने मामलों की समीक्षा कर सीधे आदेश जारी कर सकें।
इस प्रशासनिक निर्णय का सीधा लाभ उन परिवारों को मिलेगा जिन्हें स्कूल प्रवेश, संपत्ति के उत्तराधिकार, सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने या अन्य कानूनी कार्यों के लिए पुराने जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों की तत्काल आवश्यकता है। एसडीएम स्तर पर यह अधिकार मिलने से न केवल फाइलों के निपटारे में तेजी आएगी, बल्कि उच्च अधिकारियों पर काम का बोझ भी कम होगा। प्रशासन के इस कदम से राज्य में दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति आने की पूरी उम्मीद है।

