हरिद्वार में देव संस्कृति विश्वविद्यालय (DSVV) में एक उच्च स्तरीय ‘AI Summit’ का आयोजन किया गया, जिसने देश और विदेश के प्रमुख विशेषज्ञों को एक मंच पर बुलाया। इस महा मंथन का मुख्य केंद्र बिंदु ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में लोकतंत्र’ रहा। विशेषज्ञों ने गहन चर्चा की कि कैसे AI तकनीकें हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं, शासन व्यवस्था और नागरिक अधिकारों को अभूतपूर्व तरीके से प्रभावित कर रही हैं। यह समिट केवल एक चर्चा नहीं, बल्कि भारत के भविष्य के डिजिटल और सामाजिक ताने-बाने को समझने का एक महत्वपूर्ण प्रयास साबित हुआ।
इस महत्वपूर्ण आयोजन में देश-विदेश के शिक्षाविद, नीति निर्माता और टेक एक्सपर्ट्स शामिल हुए, जिन्होंने AI द्वारा उत्पन्न चुनौतियों, जैसे कि ‘डीपफेक’ (Deepfake) सामग्री और फेक न्यूज़ (Fake News) के प्रसार, पर विस्तार से बात की। कार्यक्रम के दौरान, उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने युवाओं को संबोधित करते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि उन्हें केवल तकनीक का उपयोग करना नहीं, बल्कि उससे प्रेम करना और उसे समझना भी सीखना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवा ही इस नई तकनीक के सबसे बड़े लाभार्थी और सबसे बड़े नियामक होंगे, और उन्हें डिजिटल साक्षरता के साथ-साथ नैतिक जिम्मेदारी भी सीखनी होगी।
विशेषज्ञों ने सर्वसम्मति से यह निष्कर्ष निकाला कि AI को केवल एक खतरा नहीं, बल्कि एक विशाल अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने भारतीय लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए एक व्यापक नीतिगत ढाँचे (Policy Framework) की आवश्यकता पर बल दिया। इस मंथन ने यह स्पष्ट किया कि तकनीक और संस्कृति के समन्वय से ही एक समावेशी और टिकाऊ ‘डिजिटल डेमोक्रेसी’ का निर्माण किया जा सकता है। यह आयोजन न केवल अकादमिक था, बल्कि यह भारत के नीति निर्धारकों के लिए एक दिशा-निर्देश भी साबित हुआ कि AI के उपयोग में मानवीय मूल्यों और संवैधानिक सिद्धांतों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

