विदेश नीति पर भारत का दृष्टिकोण: एस. जयशंकर ने समझाया कि क्यों देश ‘सोच-समझकर’ ही निर्णय लेता है

विदेश नीति पर भारत का दृष्टिकोण: एस. जयशंकर ने समझाया कि क्यों देश ‘सोच-समझकर’ ही निर्णय लेता है

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स (ICWA) की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर भारतीय विदेश नीति की परिपक्वता और रणनीतिक गहराई पर प्रकाश डाला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत कभी भी जल्दबाजी में कोई प्रतिक्रिया नहीं देता, बल्कि हर कदम अत्यंत विचार-विमर्श और तार्किक विश्लेषण के बाद उठाया जाता है। उन्होंने विश्व के वर्तमान जटिल भू-राजनीतिक परिदृश्य का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के निर्णय हमेशा उसके दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों की कसौटी पर खरे उतरते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि किसी भी देश के साथ संबंध केवल तात्कालिक राजनीतिक समीकरणों पर आधारित नहीं होते, बल्कि एक गहरे भरोसे और समझ पर टिका होता है, जैसा कि कनाडाई राजनीति के उदाहरण से स्पष्ट होता है।

श्री जयशंकर ने वर्तमान वैश्विक माहौल की जटिलताओं का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया, जहां टैरिफ में उतार-चढ़ाव और वैश्विक बाजारों में डंपिंग जैसी चुनौतियां लगातार बनी हुई हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत को इन सभी चुनौतियों का सामना करने के लिए एक संतुलित और बहुआयामी रणनीति अपनानी होगी। उन्होंने खाड़ी क्षेत्र और यूक्रेन जैसे दो बड़े, संवेदनशील टकरावों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन दोनों क्षेत्रों के संबंधित पक्षों के साथ भारत के मजबूत संबंध हैं, जिसके चलते किसी एक गुट या रुख पर पूरी तरह निर्भर रहना संभव नहीं है। इसके बावजूद, भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है, नए वैश्विक साझेदार और बाजार खोजे हैं, जिससे न केवल निर्यात को बढ़ावा मिला है, बल्कि हमारी सप्लाई चेन भी अभूतपूर्व रूप से लचीली साबित हुई है।

आगे देखते हुए, विदेश मंत्री ने कहा कि भारत अब केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि एक ‘वैश्विक शक्ति’ के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को निभा रहा है। भारत की बढ़ती भूमिका के साथ, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हमारी बौद्धिक भागीदारी (intellectual participation) भी उसी गति से बढ़नी चाहिए। उन्होंने ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों से जुड़ी चुनौतियों को भी वैश्विक एजेंडे का हिस्सा बताया। उनका मानना है कि पूर्व की तरह केवल प्रतिक्रिया देने के बजाय, सोच-समझकर लिए गए रणनीतिक निर्णय ही भारत के दीर्घकालिक हितों की रक्षा करते हैं। यह सर्वविदित किया गया कि ये सभी सफलताएं निरंतर संवाद, गहन बहस और वैश्विक मंचों पर सक्रिय भागीदारी का परिणाम हैं, जो भारत को एक जिम्मेदार और संतुलित वैश्विक खिलाड़ी के रूप में स्थापित करता है।