राहुल गांधी के देहरादून दौरे से पहले बवाल, परेड ग्राउंड की अनुमति पर कांग्रेस-प्रशासन आमने-सामने

राहुल गांधी के देहरादून दौरे से पहले बवाल, परेड ग्राउंड की अनुमति पर कांग्रेस-प्रशासन आमने-सामने

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से पहले ही परेड ग्राउंड को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। 17 जुलाई को होने वाले इस कार्यक्रम के लिए कांग्रेस ने पहले ही मैदान बुक कराया था, लेकिन अब कार्यक्रम स्थल की अनुमति को लेकर प्रशासन और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं।

मंगलवार देर रात कार्यक्रम का सामान लेकर पहुंचे ट्रकों को नगर निगम ने परेड ग्राउंड में प्रवेश करने से रोक दिया। इसके विरोध में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौके पर पहुंच गए और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान पुलिस ने कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने से रोका, जिससे दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। कुछ देर तक मौके पर तनाव का माहौल बना रहा।

कांग्रेस का कहना है कि उसने 10 जुलाई को नगर निगम की प्रक्रिया के अनुसार 15 से 17 जुलाई तक परेड ग्राउंड आरक्षित कराया था और इसके लिए 1.77 लाख रुपये का निर्धारित शुल्क भी जमा कर दिया था। नगर निगम ने सशर्त अनुमति भी जारी कर दी थी। बावजूद इसके अब प्रशासन कार्यक्रम को लेकर नई आपत्तियां उठा रहा है।

नगर निगम का कहना है कि परेड ग्राउंड में केंद्र सरकार का लोक संवर्धन कार्यक्रम चल रहा था, जिसे पहले 15 जुलाई तक समाप्त होना था। हालांकि हरेला पर्व के चलते इसे 16 और 17 जुलाई तक बढ़ा दिया गया है। इसके अलावा कांग्रेस की ओर से कानून-व्यवस्था (Law & Order) से संबंधित प्रशासनिक अनुमति भी मंगलवार तक नगर निगम को उपलब्ध नहीं कराई गई थी। इसी कारण ट्रकों को मैदान में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई।

वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने प्रशासन पर भाजपा सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि नियमानुसार शुल्क जमा कर मैदान आरक्षित होने के बावजूद यदि तय समय पर कार्यक्रम स्थल उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो यह लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन और तानाशाही की मिसाल होगी।

अब इस पूरे विवाद के बीच सबकी नजर प्रशासन के अगले फैसले पर है कि राहुल गांधी का प्रस्तावित कार्यक्रम परेड ग्राउंड में होगा या फिर कांग्रेस को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ेगी।