नगरासू गुरुद्वारा विवाद: 27 घंटे चला हाई-वोल्टेज ड्रामा, कर्णप्रयाग प्रकरण के बाद उत्तराखंड में सुरक्षा सख्त

नगरासू गुरुद्वारा विवाद: 27 घंटे चला हाई-वोल्टेज ड्रामा, कर्णप्रयाग प्रकरण के बाद उत्तराखंड में सुरक्षा सख्त

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले स्थित नगरासू गुरुद्वारे में शनिवार शाम शुरू हुआ विवाद रविवार रात तक जारी रहा। लगभग 27 घंटे तक चले इस घटनाक्रम ने पूरे गढ़वाल क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट मोड पर ला दिया। प्रशासन, पुलिस, आईटीबीपी और खुफिया एजेंसियों की लगातार निगरानी के बीच आखिरकार रविवार देर शाम निहंगों और प्रशासन के बीच सहमति बनी, जिसके बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने लगी।

क्या है पूरा मामला?

16 जून को कर्णप्रयाग क्षेत्र में निहंगों और स्थानीय लोगों के बीच हुई मारपीट की घटना के बाद माहौल लगातार तनावपूर्ण बना हुआ था। सोशल मीडिया पर 21 जून को बड़ी संख्या में सिख समुदाय के लोगों के कर्णप्रयाग पहुंचने की चर्चाएं चल रही थीं। इसी बीच नगरासू गुरुद्वारे में पहुंचे सात निहंगों और गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के बीच विवाद हो गया।

विवाद बढ़ने के बाद सात निहंग गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिलों पर चढ़ गए और वहां मोर्चा संभाल लिया। आरोप है कि उन्होंने प्रवेश मार्गों को अवरुद्ध कर दिया, सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए, पेयजल आपूर्ति बाधित की और कुछ स्थानों पर पत्थरबाजी भी की।

प्रशासन और निहंगों के बीच तीन दौर की वार्ता

जिलाधिकारी विशाल मिश्रा और पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर पूरे घटनाक्रम की निगरानी करते रहे। प्रशासन ने निहंगों से कई बार वार्ता की कोशिश की। एसपी नीहारिका तोमर ने करीब एक घंटे तक फोन पर बातचीत भी की, लेकिन शुरुआती दौर की वार्ता बेनतीजा रही।

निहंगों की मुख्य मांग कर्णप्रयाग प्रकरण में गिरफ्तार लोगों की रिहाई बताई जा रही थी। इसी मांग को लेकर वे अपने रुख पर अड़े रहे।

बंधक बनाए जाने का दावा

गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के अनुसार कुछ लोगों को निहंगों ने अपने कब्जे में रखा था। इनमें एक सेवादार नवतेज सिंह भी शामिल थे। हालांकि बाद में प्रशासन की मध्यस्थता के बाद दोनों लोगों को सुरक्षित छोड़ दिया गया।

रविवार शाम हुई वार्ता के बाद निहंग नीचे उतर आए और बंधक बनाए गए सेवादार को भी मुक्त कर दिया गया। एक निहंग अकाल सिंह भी बाहर आ गए, जबकि अन्य निहंगों से देर रात तक बातचीत जारी रही।

सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल तैनात

घटनाक्रम के दौरान गुरुद्वारा परिसर और आसपास के इलाकों में पुलिस, आईटीबीपी, एटीएस तथा अन्य सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई। पूरे क्षेत्र की निगरानी ड्रोन और खुफिया तंत्र के माध्यम से की जाती रही।

चमोली जिले के प्रवेश द्वार कमेड़ा में भी विशेष बैरियर लगाए गए। आने-जाने वाले वाहनों और लोगों की सघन जांच की गई। कर्णप्रयाग, गौचर और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।

इंटरनेट सेवा बंद, सोशल मीडिया पर निगरानी

प्रशासन ने एहतियात के तौर पर कई क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं। अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे वीडियो और संदेशों से कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती थी।

इंटरनेट बंद होने से संचार व्यवस्था प्रभावित रही, लेकिन प्रशासन का कहना है कि यह कदम शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया।

कब क्या हुआ? घटनाक्रम की टाइमलाइन

  • शनिवार 4 बजे: सात निहंग गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिलों पर पहुंचे।
  • 5 बजे: रास्तों पर सामान रखकर प्रवेश अवरुद्ध किया गया।
  • 6 बजे: तनाव बढ़ना शुरू।
  • 7 बजे: प्रबंधन समिति ने वार्ता का प्रयास किया।
  • 8 बजे: निहंगों द्वारा लगातार जयकारे लगाए गए।
  • 9 बजे: पुलिस और आईटीबीपी ने घेराबंदी की।
  • 10 बजे: स्थानीय लोगों और निहंगों के बीच तनाव बढ़ा।
  • 11 बजे: पेयजल आपूर्ति बाधित हुई।
  • रात 12 बजे: कई बिजली बल्ब तोड़े गए।
  • रात 2 बजे: छत की दीवारों को नुकसान पहुंचाने का आरोप।
  • रात 3:30 से सुबह 5:30 बजे तक: सड़क और वाहनों पर पत्थर फेंके जाने की सूचना।
  • रविवार सुबह 6 बजे: स्थिति कुछ शांत हुई।
  • रविवार शाम: प्रशासन और निहंगों के बीच समझौता।
  • रात करीब 8 बजे: निहंग नीचे उतरने को तैयार हुए और मामला शांत होने लगा।

प्रशासन का पक्ष

जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने कहा कि गुरुद्वारे में अरदास, लंगर और श्रद्धालुओं की आवाजाही सामान्य रूप से जारी है। उन्होंने लोगों से अफवाहों और सोशल मीडिया पर प्रसारित भ्रामक सूचनाओं पर ध्यान न देने की अपील की।

आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मामला गुरुद्वारा प्रबंधन और निहंगों के बीच विवाद का प्रतीत होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विवाद जनता या पुलिस से नहीं था और सोशल मीडिया पर प्रसारित भ्रामक पोस्टों की विशेष जांच कराई जाएगी।

गृह सचिव की चेतावनी

गृह सचिव शैलेश बगोली ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार किसी भी कीमत पर इस मामले को सांप्रदायिक रंग नहीं लेने देगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान धार्मिक सौहार्द और सामाजिक समरसता है।

सरकार ने आईजी गढ़वाल को पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। साथ ही सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने और सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

धारा 163 लागू, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए कर्णप्रयाग और आसपास के क्षेत्रों में बीएनएस की धारा 163 लागू की गई है। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की अफवाह या उकसावे वाली गतिविधि पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल नगरासू गुरुद्वारे में अरदास, लंगर और यात्रियों की आवाजाही सामान्य हो चुकी है, लेकिन सुरक्षा बल अभी भी पूरी सतर्कता के साथ क्षेत्र में तैनात हैं। पूरे मामले की जांच जारी है और प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।