“क्रिप्टो-क्रिश्चियन” गतिविधियों के आरोपों ने देहरादून में बढ़ाया तनाव, घर-घर संपर्क पर उठे सवाल
देहरादून में कथित रूप से गुप्त धार्मिक गतिविधियों को लेकर स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है। कांवली गांव में कुछ महिलाओं पर आरोप लगा है कि वे घर-घर जाकर हिंदू परिवारों से संपर्क कर उन्हें ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित कर रही थीं। बताया जा रहा है कि ये महिलाएं सामान्य बातचीत के बहाने घरों में प्रवेश करती थीं और धीरे-धीरे धार्मिक विचार साझा करने का प्रयास करती थीं।
स्थानीय लोगों का दावा है कि ये महिलाएं बाहरी तौर पर अपनी धार्मिक पहचान स्पष्ट नहीं करती थीं, जिसके चलते उन्हें “क्रिप्टो-क्रिश्चियन” कहा जा रहा है। यह शब्द उन लोगों के लिए इस्तेमाल होता है जो सार्वजनिक रूप से किसी अन्य धर्म से जुड़े दिखते हैं, लेकिन गुप्त रूप से ईसाई धर्म का पालन या प्रचार करते हैं। ऐतिहासिक रूप से, यह अवधारणा रोमन काल में सामने आई थी जब अत्याचार के डर से कई लोग अपनी पहचान छिपाकर धर्म का पालन करते थे।
इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में आक्रोश का माहौल है। स्थानीय निवासियों और कुछ संगठनों ने प्रशासन से मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि इस तरह की गतिविधियां संगठित रूप से हो रही हैं, तो इससे सामाजिक तनाव बढ़ सकता है।
सूत्रों के अनुसार, देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में ऐसे छोटे समूहों की सक्रियता की आशंका भी जताई जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है।
वहीं, एक संगठन के पदाधिकारी कुलदीप स्वेडिया ने पुलिस में शिकायत दर्ज कर दोनों महिलाओं के खिलाफ उत्तराखंड के धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि शहर में इस तरह के मामलों में वृद्धि हो रही है और इसे रोकने के लिए सख्त कदम उठाना जरूरी है।
